महाभारत 7.88.7
तस्यां विदीर्यमाणायां शिनेः पौत्रो महारथःसप्त वीरान्महेष्वासानग्रानीके व्यपोथयत्
tasyāṃ vidīryamāṇāyāṃ śineḥ pautro mahārathaḥsapta vīrānmaheṣvāsānagrānīke vyapothayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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