महाभारत 7.88.8
ते भीता मृद्यमानाश्च प्रमृष्टा दीर्घबाहुनाआयोधनं जहुर्वीरा दृष्ट्वा तमतिमानुषम्
te bhītā mṛdyamānāśca pramṛṣṭā dīrghabāhunāāyodhanaṃ jahurvīrā dṛṣṭvā tamatimānuṣam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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