महाभारत 7.89.39
तस्मिन्प्रविष्टे पृतनां शिनीनां प्रवरे रथेभोजानीकं व्यतिक्रान्ते कथमासन्हि कौरवाः
tasminpraviṣṭe pṛtanāṃ śinīnāṃ pravare rathebhojānīkaṃ vyatikrānte kathamāsanhi kauravāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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