महाभारत 7.89.43
अर्जुनश्चापि यच्चक्रे सिन्धुराजवधं प्रतितन्मे सर्वं समाचक्ष्व कुशलो ह्यसि संजय
arjunaścāpi yaccakre sindhurājavadhaṃ pratitanme sarvaṃ samācakṣva kuśalo hyasi saṃjaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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