महाभारत 7.89.5
आरोहे पर्यवस्कन्दे सरणे सान्तरप्लुतेसम्यक्प्रहरणे याने व्यपयाने च कोविदम्
ārohe paryavaskande saraṇe sāntaraplutesamyakpraharaṇe yāne vyapayāne ca kovidam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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