महाभारत 7.9.11
के दुष्प्रधर्षं राजानमिष्वासवरमच्युतम्समासेदुर्नरव्याघ्रं कौन्तेयं तत्र मामकाः
ke duṣpradharṣaṃ rājānamiṣvāsavaramacyutamsamāsedurnaravyāghraṃ kaunteyaṃ tatra māmakāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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