महाभारत 7.9.24
विष्वक्सेनो यस्य यन्ता योद्धा चैव धनंजयःअशक्यः स रथो जेतुं मन्ये देवासुरैरपि
viṣvakseno yasya yantā yoddhā caiva dhanaṃjayaḥaśakyaḥ sa ratho jetuṃ manye devāsurairapi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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