महाभारत 7.9.39
एकोऽपसृत्य चेदिभ्यः पाण्डवान्यः समाश्रितःधृष्टकेतुं तमायान्तं द्रोणात्कः समवारयत्
eko'pasṛtya cedibhyaḥ pāṇḍavānyaḥ samāśritaḥdhṛṣṭaketuṃ tamāyāntaṃ droṇātkaḥ samavārayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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