महाभारत 7.9.42
देवव्रतस्य समरे हेतुं मृत्योर्महात्मनःद्रोणायाभिमुखं यान्तं के वीराः पर्यवारयन्
devavratasya samare hetuṃ mṛtyormahātmanaḥdroṇāyābhimukhaṃ yāntaṃ ke vīrāḥ paryavārayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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