महाभारत 7.9.7
यत्तदुद्यन्निवादित्यो ज्योतिषा प्रणुदंस्तमःआयादजातशत्रुर्वै कस्तं द्रोणादवारयत्
yattadudyannivādityo jyotiṣā praṇudaṃstamaḥāyādajātaśatrurvai kastaṃ droṇādavārayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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