महाभारत 7.90.43
तं विषण्णं रथे दृष्ट्वा तावका भरतर्षभहार्दिक्यं पूजयामासुर्वासांस्यादुधुवुश्च ह
taṃ viṣaṇṇaṃ rathe dṛṣṭvā tāvakā bharatarṣabhahārdikyaṃ pūjayāmāsurvāsāṃsyādudhuvuśca ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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