महाभारत 7.91.11
दृष्ट्वा तु तव तत्सैन्यं रथाश्वद्विपसंकुलम्पदातिजनसंपूर्णमब्रवीत्सारथिं पुनः
dṛṣṭvā tu tava tatsainyaṃ rathāśvadvipasaṃkulampadātijanasaṃpūrṇamabravītsārathiṃ punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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