महाभारत 7.92.1
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
ते किरन्तः शरव्रातान्सर्वे यत्ताः प्रहारिणःत्वरमाणा महाराज युयुधानमयोधयन्
te kirantaḥ śaravrātānsarve yattāḥ prahāriṇaḥtvaramāṇā mahārāja yuyudhānamayodhayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें