महाभारत 7.92.3
विकर्णश्चापि निशितैस्त्रिंशद्भिः कङ्कपत्रिभिःविव्याध सव्ये पार्श्वे तु स्तनाभ्यामन्तरे तथा
vikarṇaścāpi niśitaistriṃśadbhiḥ kaṅkapatribhiḥvivyādha savye pārśve tu stanābhyāmantare tathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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