महाभारत 7.93.18
स विद्ध्वा समरे द्रोणं सिंहनादममुञ्चततं वै न ममृषे द्रोणः सर्वशस्त्रभृतां वरः
sa viddhvā samare droṇaṃ siṃhanādamamuñcatataṃ vai na mamṛṣe droṇaḥ sarvaśastrabhṛtāṃ varaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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