महाभारत 7.93.24
चकार सात्यकी राजंस्तत्र कर्मातिमानुषम्अयोधयच्च यद्द्रोणं रश्मीञ्जग्राह च स्वयम्
cakāra sātyakī rājaṃstatra karmātimānuṣamayodhayacca yaddroṇaṃ raśmīñjagrāha ca svayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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