महाभारत 7.93.9
समुत्पतन्ति वल्मीकाद्यथा क्रुद्धा महोरगाःतथा द्रोणरथाद्राजन्नुत्पतन्ति तनुच्छिदः
samutpatanti valmīkādyathā kruddhā mahoragāḥtathā droṇarathādrājannutpatanti tanucchidaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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