महाभारत 7.95.32
सात्यकिं ते समासाद्य पृतनास्वनिवर्तिनम्बहवो लघुहस्ताश्च शरवर्षैरवाकिरन्
sātyakiṃ te samāsādya pṛtanāsvanivartinambahavo laghuhastāśca śaravarṣairavākiran
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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