महाभारत 7.96.32
उत्स्मयन्वृष्णिशार्दूलस्तथा बाणैः समाहतःतानविध्यन्महाराज सर्वानेव त्रिभिस्त्रिभिः
utsmayanvṛṣṇiśārdūlastathā bāṇaiḥ samāhataḥtānavidhyanmahārāja sarvāneva tribhistribhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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