महाभारत 7.96.37
दुःशासनश्च दशभिर्दुःसहश्च त्रिभिः शरैःदुर्मुखश्च द्वादशभी राजन्विव्याध सात्यकिम्
duḥśāsanaśca daśabhirduḥsahaśca tribhiḥ śaraiḥdurmukhaśca dvādaśabhī rājanvivyādha sātyakim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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