महाभारत 7.97.18
तांश्च संचोदयन्सर्वान्घ्नतैनमिति भारतदुःशासनो महाराज सात्यकिं पर्यवारयत्
tāṃśca saṃcodayansarvānghnatainamiti bhārataduḥśāsano mahārāja sātyakiṃ paryavārayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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