महाभारत 7.97.41
अद्रीणां भिद्यमानानामन्तरिक्षे शितैः शरैःशब्देन प्राद्रवन्राजन्गजाश्वरथपत्तयः
adrīṇāṃ bhidyamānānāmantarikṣe śitaiḥ śaraiḥśabdena prādravanrājangajāśvarathapattayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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