महाभारत 7.97.45
तं शब्दं तुमुलं श्रुत्वा द्रोणो यन्तारमब्रवीत्एष सूत रणे क्रुद्धः सात्वतानां महारथः
taṃ śabdaṃ tumulaṃ śrutvā droṇo yantāramabravīteṣa sūta raṇe kruddhaḥ sātvatānāṃ mahārathaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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