महाभारत 7.97.46
दारयन्बहुधा सैन्यं रणे चरति कालवत्यत्रैष शब्दस्तुमुलस्तत्र सूत रथं नय
dārayanbahudhā sainyaṃ raṇe carati kālavatyatraiṣa śabdastumulastatra sūta rathaṃ naya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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