महाभारत 7.97.8
निर्जित्य समरे द्रोणं कृतिनं युद्धदुर्मदम्यथा पशुगणान्सिंहस्तद्वद्धन्ता सुतान्मम
nirjitya samare droṇaṃ kṛtinaṃ yuddhadurmadamyathā paśugaṇānsiṃhastadvaddhantā sutānmama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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