महाभारत 7.98.30
संनिरुद्धं रणे द्रोणं पाञ्चाला वीक्ष्य मारिषआवव्रुः सर्वतो राजन्धर्मपुत्रजयैषिणः
saṃniruddhaṃ raṇe droṇaṃ pāñcālā vīkṣya māriṣaāvavruḥ sarvato rājandharmaputrajayaiṣiṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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