महाभारत 7.98.38
अभ्यद्रवन्त सहिता भारद्वाजं युयुत्सवःमुञ्चन्तः शरवर्षाणि तपान्ते जलदा इव
abhyadravanta sahitā bhāradvājaṃ yuyutsavaḥmuñcantaḥ śaravarṣāṇi tapānte jaladā iva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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