महाभारत 7.98.3
राजपुत्रो भवानत्र राजभ्राता महारथःकिमर्थं द्रवसे युद्धे यौवराज्यमवाप्य हि
rājaputro bhavānatra rājabhrātā mahārathaḥkimarthaṃ dravase yuddhe yauvarājyamavāpya hi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें