महाभारत 7.98.4
स्वयं वैरं महत्कृत्वा पाञ्चालैः पाण्डवैः सहएकं सात्यकिमासाद्य कथं भीतोऽसि संयुगे
svayaṃ vairaṃ mahatkṛtvā pāñcālaiḥ pāṇḍavaiḥ sahaekaṃ sātyakimāsādya kathaṃ bhīto'si saṃyuge
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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