महाभारत 7.98.7
क्व ते मानश्च दर्पश्च क्व च तद्वीर गर्जितम्आशीविषसमान्पार्थान्कोपयित्वा क्व यास्यसि
kva te mānaśca darpaśca kva ca tadvīra garjitamāśīviṣasamānpārthānkopayitvā kva yāsyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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