महाभारत 7.99.10शैनेयशरसंकृत्तैः शोणितौघपरिप्लुतैःअशोभत महाराज किंशुकैरिव पुष्पितैःśaineyaśarasaṃkṛttaiḥ śoṇitaughapariplutaiḥaśobhata mahārāja kiṃśukairiva puṣpitaiḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें