महाभारत 7.99.3
स तु दुःशासनं वीरः सायकैरावृणोद्भृशम्मशकं समनुप्राप्तमूर्णनाभिरिवोर्णया
sa tu duḥśāsanaṃ vīraḥ sāyakairāvṛṇodbhṛśammaśakaṃ samanuprāptamūrṇanābhirivorṇayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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