महाभारत 8.1.28
संपूज्य च यथान्यायं धृतराष्ट्रं महीपतिम्हा कष्टमिति चोक्त्वा स ततो वचनमाददे
saṃpūjya ca yathānyāyaṃ dhṛtarāṣṭraṃ mahīpatimhā kaṣṭamiti coktvā sa tato vacanamādade
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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