महाभारत 8.1.42नारायणास्त्रे निहते द्रोणपुत्रस्य धीमतःहतशेषेष्वनीकेषु किमकुर्वत मामकाःnārāyaṇāstre nihate droṇaputrasya dhīmataḥhataśeṣeṣvanīkeṣu kimakurvata māmakāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें