महाभारत 8.1.9
ततः प्रभाते विमले स्थिता दिष्टस्य शासनेचक्रुरावश्यकं सर्वे विधिदृष्टेन कर्मणा
tataḥ prabhāte vimale sthitā diṣṭasya śāsanecakrurāvaśyakaṃ sarve vidhidṛṣṭena karmaṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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