महाभारत 8.11.3
भीमसेनः समाकीर्णो द्रौणिना निशितैः शरैःरराज समरे राजन्रश्मिवानिव भास्करः
bhīmasenaḥ samākīrṇo drauṇinā niśitaiḥ śaraiḥrarāja samare rājanraśmivāniva bhāskaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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