महाभारत 8.12.36
ततः संशप्तकान्भूयः साश्वसूतरथद्विपान्ध्वजपत्तिगणानुग्रैर्बाणैर्विव्याध पाण्डवः
tataḥ saṃśaptakānbhūyaḥ sāśvasūtarathadvipāndhvajapattigaṇānugrairbāṇairvivyādha pāṇḍavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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