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महाभारत 8.13.19
अथार्धचन्द्रेण हृतं किरीटिना; पपात दण्डस्य शिरः क्षितिं द्विपात्तच्छोणिताभं निपतद्विरेजे; दिवाकरोऽस्तादिव पश्चिमां दिशम्
athārdhacandreṇa hṛtaṃ kirīṭinā; papāta daṇḍasya śiraḥ kṣitiṃ dvipāttacchoṇitābhaṃ nipatadvireje; divākaro'stādiva paścimāṃ diśam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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