Loading
महाभारत 8.13.23
अथार्जुनं स्वे परिवार्य सैनिकाः; पुरंदरं देवगणा इवाब्रुवन्अभैष्म यस्मान्मरणादिव प्रजाः; स वीर दिष्ट्या निहतस्त्वया रिपुः
athārjunaṃ sve parivārya sainikāḥ; puraṃdaraṃ devagaṇā ivābruvanabhaiṣma yasmānmaraṇādiva prajāḥ; sa vīra diṣṭyā nihatastvayā ripuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें