महाभारत 8.14.48
विचित्रान्मणिचित्रांश्च जातरूपपरिष्कृतान्अश्वास्तरपरिस्तोमान्राङ्कवान्पतितान्भुवि
vicitrānmaṇicitrāṃśca jātarūpapariṣkṛtānaśvāstaraparistomānrāṅkavānpatitānbhuvi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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