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महाभारत 8.14.55
जलं दृष्ट्वा प्रधावन्ति क्रोशमानाः परस्परम्जलं पीत्वा मृतान्पश्य पिबतोऽन्यांश्च भारत
jalaṃ dṛṣṭvā pradhāvanti krośamānāḥ parasparamjalaṃ pītvā mṛtānpaśya pibato'nyāṃśca bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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