महाभारत 8.15.17
महता रथघोषेण दिवं भूमिं च नादयन्वर्षान्ते सस्यहा पीथो भाभिरापूरयन्निव
mahatā rathaghoṣeṇa divaṃ bhūmiṃ ca nādayanvarṣānte sasyahā pītho bhābhirāpūrayanniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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