महाभारत 8.15.8द्विरदान्प्रहतप्रोथान्विपताकध्वजायुधान्सपादरक्षानवधीद्वज्रेणारीनिवारिहाdviradānprahataprothānvipatākadhvajāyudhānsapādarakṣānavadhīdvajreṇārīnivārihāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें