महाभारत 8.17.65
नकुलस्तु ततः कर्णं विद्ध्वा सप्तभिरायसैःअथास्य धनुषः कोटिं पुनश्चिच्छेद मारिष
nakulastu tataḥ karṇaṃ viddhvā saptabhirāyasaiḥathāsya dhanuṣaḥ koṭiṃ punaściccheda māriṣa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें