महाभारत 8.17.71
बाणजालावृते व्योम्नि छादिते च दिवाकरेसमसर्पत्ततो भूतं किंचिदेव विशां पते
bāṇajālāvṛte vyomni chādite ca divākaresamasarpattato bhūtaṃ kiṃcideva viśāṃ pate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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