महाभारत 8.17.77
निदर्शयन्तौ त्वस्त्राणि दिव्यानि रणमूर्धनिछादयन्तौ च सहसा परस्परवधैषिणौ
nidarśayantau tvastrāṇi divyāni raṇamūrdhanichādayantau ca sahasā parasparavadhaiṣiṇau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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