महाभारत 8.18.38
तत्र नादो महानासीत्पाण्डवानां विशां पतेसौबलं समरे दृष्ट्वा विचरन्तमभीतवत्
tatra nādo mahānāsītpāṇḍavānāṃ viśāṃ patesaubalaṃ samare dṛṣṭvā vicarantamabhītavat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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