महाभारत 8.18.43
गौतमस्य वपुर्दृष्ट्वा धृष्टद्युम्नरथं प्रतिवित्रेसुः सर्वभूतानि क्षयं प्राप्तं च मेनिरे
gautamasya vapurdṛṣṭvā dhṛṣṭadyumnarathaṃ prativitresuḥ sarvabhūtāni kṣayaṃ prāptaṃ ca menire
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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