महाभारत 8.18.50
विनिःश्वस्य ततः क्रुद्धः कृपः शारद्वतो नृपपार्षतं छादयामास निश्चेष्टं सर्वमर्मसु
viniḥśvasya tataḥ kruddhaḥ kṛpaḥ śāradvato nṛpapārṣataṃ chādayāmāsa niśceṣṭaṃ sarvamarmasu
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें