महाभारत 8.18.54
व्यावर्तये तत्र रथं नदीवेगमिवार्णवात्अवध्यं ब्राह्मणं मन्ये येन ते विक्रमो हतः
vyāvartaye tatra rathaṃ nadīvegamivārṇavātavadhyaṃ brāhmaṇaṃ manye yena te vikramo hataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें